अध्याय 10: विभूति योग

विभूति योग श्रीमद्भगवद्गीता का दसवाँ अध्याय है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को अपनी दिव्य विभूतियों और महान शक्तियों का विस्तार से वर्णन करते हैं। वे बताते हैं कि इस संसार में जो भी श्रेष्ठ, अद्भुत और शक्तिशाली है, वह उनकी ही शक्ति का अंश है। इस अध्याय में भगवान अपनी उपस्थिति को प्रकृति, देवताओं, ऋषियों, पर्वतों, नदियों और विभिन्न तत्वों में प्रकट करते हैं। इसका उद्देश्य अर्जुन को यह समझाना है कि ईश्वर हर जगह विद्यमान हैं। विभूति योग मनुष्य को ईश्वर की सर्वव्यापकता का अनुभव कराने और उनके प्रति श्रद्धा एवं भक्ति को मजबूत करने का मार्ग दिखाता है।

No Content Yet

This श्लोक doesn't have any published stories at the moment.

Most Popular Bhajans

मोहन से दिल क्यों लगाया है ये मैं जानू या वो जाने भजन
119 reads

मोहन से दिल क्यों लगाया है ये मैं जानू या वो जाने भजन

मोहन से दिल क्यूँ लगाया है, ये मैं जानू या वो जानेछलिया से दिल क्यूँ लगाया है, ये मैं जानू या वो जाने ॥ हर बात निराली है उसकी, हर बात में है इक टेढापनटेढ़े ...

बड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदिरवा माँ भजन
86 reads

बड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदिरवा माँ भजन

बड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदिरवा माँबड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदिरवा माँ पावन ज्योति की लागे कतार माई तोरे मंदिरवा माँबड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदि...

वृंदावन की गलियों में राधे राधे गूंजे
78 reads

वृंदावन की गलियों में राधे राधे गूंजे

वृन्दावन की कुञ्ज गली में मैं राधे राधे गाउंगी,मैं तो श्यामा श्यामा गाउंगी, पहले मैं बरसाने जाऊ,श्याम श्यामा के दर्शन पाउ,फिर वृन्दावन जाउंगी  राधे राध...

दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ भजन
67 reads

दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ भजन

दुर्गा है मेरी माँ,अम्बे है मेरी माँ।। जय बोलो जय माता दी, जय हो,जो भी दर पे आए, जय हो,वो खाली ना जाए, जय हो, सबके काम है करती, जय हो,सबके दुखड़े हरती, जय ह...

भगवद् गीता 1.1: अध्याय 1, श्लोक 1
63 reads

भगवद् गीता 1.1: अध्याय 1, श्लोक 1

धृतराष्ट्र उवाच:धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय॥1॥ Dhritarashtra said:Dharmakshetre Kurukshetre samaveta yuyu...