चले श्याम सुंदर से मिलने चले सुदामा गाते चले मन में भजन
चले श्याम सुंदर से मिलने चले सुदामा
गाते चले मन में हरे कृष्ण रामा |
लोटा व डोरी काँधे पे लटकाये
चावल की पोटली बगल में दबाये
पहुंचे हैं जाये द्वारका पूरी धामा
विप्र सुदामा जो द्वारे पे आये
छोड़ के सिंहासन श्री कृष्ण जी धाये
सीने से सीना मिलाय घनश्यामा
हँस हंस के पूछे वो कृष्ण कन्हाई
कहो भेंट भेजी है क्या भौजाई
चावल की पोटली छिपावे सुदामा
रहो कुछ दिन श्याम के संग सुदामा
चलो फिर तो घनश्याम ऐसे हैं बोले
आओ भइया रहो यही ठामा
विदा माँग कर फिर सुदामा चला है
मगर उसको अपना घर न मिला है
झोपड़ियों के बदले महल था वहाँ पर
सुदामा को धोखा करारा रहा है
नारी सुशीला जो द्वारे पे आयी
पति को देख विरह यह सुनाई
आओ स्वामी हरने दिया है धन धामा
तब तो सुदामा जी महलन को धाये
प्रेम से हरि के कीर्तन गाये
मण्डल कहे बोलो जय जय सिया रामा
राधे राधे! जय श्री राधे!